वर्ष 2030 तक बाल विवाह मुक्त भारत बनाने का ऋषिकेश में लिया संकल्प राष्ट्रीय महिला आयोग अध्यक्ष ने महिलाओं को दिलाई शपथ,


ऋषिकेश 31 अक्टूबर। राष्ट्रीय महिला आयोग एवं उत्तराखंड राज्य महिला आयोग के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश के मुख्य सभागार में ‘शक्ति समागम : सृजन से समृद्धि’ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने वर्ष 2030 तक भारत को बाल विवाह मुक्त राष्ट्र बनाने का सामूहिक संकल्प दिलाया। इस दौरान स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और लखपति दीदियों ने बड़ी संख्या में प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने कहा कि स्वयं सहायता समूह अब केवल बचत का माध्यम नहीं रह गए हैं, बल्कि महिला आत्मविश्वास, वित्तीय स्वावलंबन और सामाजिक परिवर्तन की मजबूत आधारशिला बन चुके हैं। महिलाओं के चेहरों पर संघर्ष से सफलता तक का सफर स्पष्ट दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में करीब 22 हजार स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 2.5 लाख से अधिक महिलाओं ने 300 करोड़ रुपये से अधिक का बैंक ऋण लेकर वित्तीय अनुशासन और उद्यमशीलता का उदाहरण प्रस्तुत किया है। यह उपलब्धि पूरे देश के लिए प्रेरणादायी है।
उन्होंने कहा कि बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को समाप्त करने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को आगे आना होगा। बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा और अधिकारों को प्राथमिकता देते हुए वर्ष 2030 तक भारत को बाल विवाह मुक्त बनाने का लक्ष्य हासिल करना है। इस दौरान उन्होंने उपस्थित महिलाओं को बाल विवाह रोकने, बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित करने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की शपथ भी दिलाई। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों को बचत तक सीमित न रखकर अधिकारों, साइबर सुरक्षा, कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से बचाव (पॉश), घरेलू हिंसा कानून और पोषण संबंधी जानकारी से जोड़ने पर जोर दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा कि पर्वतीय राज्य की महिलाएं बेहद जुझारू, कर्मठ और आत्मनिर्भर हैं। महिला आयोग महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए निरंतर अभियान चला रहा है। उन्होंने महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने, उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और उनके उत्पादों को वैश्विक मंच उपलब्ध कराने के प्रयासों की सराहना की।
विशिष्ट अतिथि ऋषिकेश विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि उत्तराखंड के निर्माण और विकास में मातृशक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। राज्य सरकार महिलाओं को सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण और लखपति दीदी योजना के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही है। इन योजनाओं के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।
नगर निगम ऋषिकेश के महापौर शंभू पासवान और एम्स की निदेशक डॉ. मीनू सिंह ने भी महिला स्वास्थ्य, आर्थिक आत्मनिर्भरता और संस्थागत सहयोग को मजबूत बनाने पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम के समापन पर महिलाओं ने स्वरोजगार को बढ़ावा देने, बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने और समाज के समग्र विकास में सक्रिय भागीदारी निभाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर राष्ट्रीय महिला आयोग के उप निदेशक रामावतार सिंह, राज्यमंत्री चारु कोठारी, प्रदेश महिला मोर्चा अध्यक्ष रुचि भट्ट, तुलसी मेहरा, रेखा रयाल, उर्वशी चौहान, कृतिका दबई और गुनिता सहित अनेक महिलाएं मौजूद रहीं।


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