

ऋषिकेश, 25 अक्टूबर। शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर मुनि की रेती स्थित योग महोत्सव घाट पर गंगा तट योग, ध्यान और संगीत की सुरमयी साधना से सराबोर रहा। पांच दिवसीय महायोग ध्यान कुंभ-9.0 के तीसरे दिन देश-विदेश से आए साधकों ने सामूहिक ध्यान, योगाभ्यास और संगीतमय साधना के माध्यम से आंतरिक शांति और विश्व शांति का संदेश दिया। पिरामिड स्पिरिचुअल सोसाइटीज मूवमेंट (पीएसएसएम) और पीएमसी हिंदी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित महोत्सव में दिनभर आध्यात्मिक संवाद और ध्यान के विभिन्न सत्र आयोजित किए गए।
प्रातःकालीन सत्र में योग प्रशिक्षक सामंत के निर्देशन में सूक्ष्म व्यायाम, ताड़ासन, तिर्यक ताड़ासन, कटी चक्रासन और शोल्डर रोटेशन सहित विभिन्न योगासन कराए गए। इसके बाद साधकों ने अनुलोम-विलोम, नाड़ी शोधन, कपालभाति, ओंकार और भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास किया। सामंत ने कहा कि शरीर के प्रति सजगता सूक्ष्म चेतना की ओर बढ़ने का प्रारंभिक मार्ग है। योग और ध्यान के नियमित अभ्यास से मन को एकाग्र करने तथा स्वयं को समझने में सहायता मिलती है।
योगाभ्यास के बाद वरिष्ठ पिरामिड मास्टर कविता चड्ढा ने आनापानसती ध्यान का अभ्यास कराया। इस ध्यान पद्धति में प्राकृतिक श्वासों के आने-जाने के प्रति सजग रहने पर जोर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि शरीर के लिए योग, मन के लिए शांति, बुद्धि के लिए ज्ञान और आत्मा के लिए ध्यान आवश्यक है।
वातावरण के बीच अपनी श्वास पर ध्यान केंद्रित किया। इस दौरान पितामह सुभाष पत्रीजी के ध्यान संबंधी संदेशों को भी साझा किया गया। वक्ताओं ने आत्मचिंतन, मानसिक शांति और कर्म सिद्धांत की समझ को आध्यात्मिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया।
महोत्सव के तीसरे दिन संगीत और ध्यान का अनूठा संगम भी देखने को मिला। गणेश कुमार ने वायलिन, राघवेंद्र ने बांसुरी, राम कृष्ण ने सितार, कार्तिक प्रणव ने मृदंगम और संतोष ने तबले पर प्रस्तुति दी। भारतीय वाद्ययंत्रों की मधुर धुनों के बीच साधकों ने ध्यान किया। संगीतमय वातावरण ने कार्यक्रम को विशेष आध्यात्मिक स्वरूप प्रदान किया।
विशेष सत्र में हैदराबाद के निकट तेलंगाना के कड़ताल स्थित महेश्वरा महापिरामिड और पत्रीजी शक्ति स्थल की गतिविधियों तथा भावी योजनाओं की जानकारी दी गई। ट्रस्ट के प्रतिनिधि टी. विजय भास्कर रेड्डी ने ध्यान को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने, शाकाहार को बढ़ावा देने और अधिक से अधिक लोगों तक ध्यान का संदेश पहुंचाने का आह्वान किया।
उन्होंने बताया कि कड़ताल में लगभग 70 एकड़ क्षेत्र में विश्व ध्यान केंद्र और ‘स्टैच्यू ऑफ मेडिटेशन’ के निर्माण पर कार्य चल रहा है। आयोजकों का लक्ष्य वर्ष 2030 तक इसे वैश्विक ध्यान केंद्र के रूप में विकसित करना है। इस अवसर पर माधवी द्रिका, हरप्रीत सिंह, इशिता पुजारी, वेणु प्रसाद, महेश अग्रवाल, महेश्वरी मैडम और पी.वी. रामराजू सहित अन्य वक्ताओं ने सामूहिक ध्यान और आध्यात्मिक साधना के महत्व पर विचार रखे।
कार्यक्रम में 21 से 31 दिसंबर 2026 तक कड़ताल में आयोजित होने वाले 11 दिवसीय ‘पत्रीजी ध्यान महायज्ञ’ में शामिल होने का आमंत्रण भी दिया गया। इस दौरान ‘चलो रे पत्रीजी शक्ति स्थल’ गीत पर सांस्कृतिक प्रस्तुति दी गई।
महोत्सव में बच्चों के लिए ‘जाग्रत किड्स’ और युवाओं के लिए ‘स्वानुभव यूथ’ कार्यशालाएं आयोजित की गईं। इनके माध्यम से ध्यान, आत्म-जागरूकता और व्यक्तित्व विकास से जुड़े विषयों पर गतिविधियां कराई गईं। आयोजकों ने विश्व शांति के उद्देश्य से 108 घंटे के अखंड सामूहिक ध्यान कार्यक्रम को भी महोत्सव की प्रमुख गतिविधियों में शामिल किया।
आयोजकों के अनुसार, महायोग ध्यान कुंभ-9.0 का उद्देश्य योग, ध्यान और आत्मचिंतन को जन-जन तक पहुंचाना तथा आंतरिक परिवर्तन के माध्यम से विश्व शांति का संदेश प्रसारित करना है। तीसरे दिन के कार्यक्रमों में योगाभ्यास, आनापानसती ध्यान, संगीत साधना और आध्यात्मिक संवाद के माध्यम से इसी संकल्प को आगे बढ़ाया गया।
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