ऋषिकेश में वैदिक ब्राह्मण महासभा का वार्षिक सम्मेलन सम्पन्न, वैदिक संस्कृति संरक्षण का लिया संकल्प


ऋषिकेश, 18 मार्च ।तीर्थनगरी ऋषिकेश में वैदिक ब्राह्मण महासभा का वार्षिक सम्मेलन श्री जनार्दन आश्रम दंडीवाड़ा में विधिवत सम्पन्न हुआ। सम्मेलन में सैकड़ों ब्राह्मणों ने सहभागिता कर वैदिक संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ ज्योतिषपीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य ब्रह्मलीन स्वामी श्री माधवाश्रम जी महाराज के समाधि स्थल सभागार में दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।

मुख्य अतिथि प्रसिद्ध कथावाचक एवं ज्योतिष पीठ के व्यास, पूर्व राज्यमंत्री आचार्य शिव प्रसाद ममगाँई, कार्यक्रम अध्यक्ष पूर्व प्राचार्य एवं राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित डॉ. ओमप्रकाश भट्ट सहित पूर्व राज्यमंत्री आचार्य सुभाष जोशी, वेदाचार्य मायाराम रतूड़ी, काशी से पधारे दंडी स्वामी अनिरुद्धानंद तीर्थ तथा केशव स्वरूप ब्रह्मचारी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित किया।
सम्मेलन में महासभा के पदाधिकारियों द्वारा सभी अतिथियों एवं वैदिक विद्वानों का उत्तरीय एवं पुष्पमालाओं से सम्मान किया गया। महासभा के महामंत्री आचार्य शिव स्वरूप सेमवाल ने स्वागत भाषण देते हुए संस्था की गतिविधियों और समाज के प्रति किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी।
इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विद्वानों को सम्मानित किया गया। व्याकरण के क्षेत्र में पूर्व प्राचार्य महेंद्र नारायण शुक्ल, ज्योतिष के क्षेत्र में पूर्व प्राचार्य जयकृष्ण सेमवाल तथा वेद के क्षेत्र में कार्य करने वाले शिव कुमार मालवीय सहित विभिन्न संस्कृत महाविद्यालयों एवं विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को सम्मान प्रदान किया गया।
मुख्य अतिथि आचार्य शिव प्रसाद ममगाँई ने कहा कि वैदिक ब्राह्मण महासभा द्वारा किए जा रहे प्रयास अत्यंत सराहनीय हैं। उन्होंने वर्तमान समय में वैदिक सनातन परंपराओं के संरक्षण को बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि समाज को एकजुट होकर कार्य करना होगा। उन्होंने त्योहारों एवं व्रतों को लेकर फैल रही भ्रांतियों को दूर करने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. ओमप्रकाश भट्ट ने कहा कि ब्राह्मण समाज का दर्पण होता है और उसके आचार-विचार से समाज प्रेरणा लेता है। उन्होंने संस्कारों और पूजा पद्धति के महत्व को रेखांकित करते हुए इन्हें समाज तक पहुंचाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि आचार्य सुभाष जोशी, मायाराम रतूड़ी, केशव स्वरूप ब्रह्मचारी, दंडी स्वामी अनिरुद्धानंद तीर्थ, महेंद्र नारायण शुक्ल सहित अन्य विद्वानों ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

आचार्य सुभाष चंद्र डोभाल के संचालन में आयोजित इस सम्मेलन में महासभा के अध्यक्ष आचार्य जगमोहन मिश्रा, महामंत्री आचार्य शिव प्रसाद सेमवाल, पूर्व महापौर अनीता ममगाई, जयेन्द्र रमोला, लक्ष्मण सिंह चौहान, डॉ. ओम प्रकाश पूर्वाल, डॉ. जनार्दन कैरवान, डॉ. गिरीश पाण्डेय, केपी उनियाल, अभिषेक शर्मा, रमाबल्लभ भट्ट, पार्षद रीना शर्मा, माधुरी गुप्ता, एल.पी. पुरोहित, संदीप शास्त्री, पूर्व अध्यक्ष गंगाराम व्यास, मणिराम पैन्यूली, महेश चमोली, जितेंद्र भट्ट, राजेंद्र पाण्डेय, मुकेश थपलियाल, हरेन्द्र भट्ट, आयुष कोठारी, सूरज विजल्वान, जगदीश जोशी, हर्षमणि नौटियाल, मनोज चमोली सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।


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