हरिद्वार 07 मार्च। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार को हरिद्वार के बैरागी कैंप में आयोजित ‘जन-जन की सरकार, 4 साल बेमिसाल’ कार्यक्रम में उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने उत्तराखण्ड आंदोलन, राज्य के विकास, नई न्याय संहिता, नागरिकता संशोधन कानून और विभिन्न विकास योजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
अपने संबोधन की शुरुआत उत्तराखण्ड आंदोलन के उल्लेख से करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड के युवाओं को अपनी पहचान, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरना पड़ा। इस आंदोलन के दौरान उन्हें रामपुर तिराहा घटना जैसी दर्दनाक घटना का सामना भी करना पड़ा। उन्होंने कहा कि बाद में केंद्र में भाजपा सरकार बनने पर तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उत्तराखण्ड के साथ ही झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे नए राज्यों का निर्माण करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। आज ये तीनों राज्य विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा ने हमेशा कहा है कि उत्तराखण्ड को अटल जी ने बनाया है और इसे संवारने का काम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। इसी क्रम में वर्ष 2017 से 2026 तक का समय उत्तराखण्ड के विकास को समर्पित रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की प्रशंसा करते हुए कहा कि पिछले चार वर्षों में उन्होंने राज्य की कई पुरानी समस्याओं को खत्म करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं, जिसके कारण उत्तराखण्ड अब दोगुनी गति से विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों, विशेषकर अधिवक्ताओं से नई न्याय संहिता पर लगी प्रदर्शनी का अवलोकन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंग्रेजों के समय के लगभग डेढ़ सौ साल पुराने कानूनों को बदलकर नई न्याय व्यवस्था लागू करने का कार्य किया है। वर्ष 2028 तक नई न्याय संहिता के सभी प्रावधान पूरी तरह लागू हो जाएंगे, जिसके बाद किसी भी मामले में एफआईआर दर्ज होने से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक अंतिम निर्णय आने में अधिकतम तीन वर्ष का समय लगेगा। उन्होंने इसे दुनिया की सबसे आधुनिक और वैज्ञानिक न्याय व्यवस्था बताया।
केंद्रीय गृह मंत्री ने सी ए ए के तहत भारत की नागरिकता प्राप्त करने वाले शरणार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन शरणार्थियों को भी इस देश में वही अधिकार मिलेंगे जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्राप्त हैं। उन्होंने कहा कि वर्षों तक तुष्टिकरण की राजनीति के कारण इन शरणार्थियों को नागरिकता से वंचित रखा गया, जबकि वे अपने धर्म और परिवार की रक्षा के लिए भारत आए थे। सरकार ऐसे लोगों को नागरिकता देने के निर्णय पर पूरी तरह अडिग है।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं, जिनमें धारा 370 को समाप्त करना, अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर महाकाल लोक का विकास और केदारनाथ मंदिर, बद्रीनाथ मंदिर धामों का पुनर्निर्माण शामिल है।
उन्होंने उत्तराखण्ड पुलिस में आरक्षी पद पर नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले लगभग 1900 युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि राज्य में अब बिना पर्चा और बिना खर्चा के सरकारी नौकरियां मिल रही हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा लाया गया सख्त नकल विरोधी कानून रोजगार के क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित कर रहा है।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि वर्ष 2027 में हरिद्वार में होने वाला कुम्भ मेला पुराने रिकॉर्ड तोड़ने वाला होगा। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार की Vibrant Villages Programme के तहत देश के सीमांत गांवों को “प्रथम गांव” का दर्जा दिया गया है, जिसका उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों से पलायन रोकना है। यह योजना उत्तराखण्ड के लिए विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध होगी।
अमित शाह ने राज्य में लगभग 10 हजार एकड़ सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सराहना करते हुए कहा कि सरकार केदारनाथ से कन्याकुमारी तक एक-एक घुसपैठिए को देश से बाहर करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने राज्य में लागू यू सी सी की भी प्रशंसा की और कहा कि इससे जनसंख्या संरचना में होने वाले अप्राकृतिक बदलाव को रोकने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2004 से 2014 के बीच उत्तराखण्ड को केंद्र से लगभग ₹54 हजार करोड़ की सहायता मिली थी, जबकि 2014 के बाद से यह राशि बढ़कर ₹1.87 लाख करोड़ से अधिक हो गई है। केंद्र सरकार के सहयोग से राज्य में ऑल वेदर रोड परियोजना, दिल्ली-देहरादून आर्थिक कॉरिडोर, रेल और सड़क समेत कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 में उत्तराखण्ड की प्रति व्यक्ति आय ₹1.80 लाख थी, जो अब बढ़कर ₹2.74 लाख हो गई है। इसी तरह राज्य की जीएसडीपी ₹2.22 लाख करोड़ से बढ़कर ₹3.82 लाख करोड़ तक पहुंच चुकी है, जो राज्य के तेज़ी से हो रहे आर्थिक विकास को दर्शाती है।











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