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ऋषिकेश में आत्मबोध का महाकुंभ: आचार्य प्रशांत के शिविर में उमड़ा जनसैलाब, देश-विदेश से जुटे साधक


ऋषिकेश, 27 अप्रैल।तीन वर्षों के अंतराल के बाद योगनगरी ऋषिकेश में आयोजित आचार्य प्रशांत का दो दिवसीय आध्यात्मिक शिविर 25 और 26 अप्रैल को अभूतपूर्व उत्साह, ऊर्जा और व्यापक सहभागिता के साथ संपन्न हुआ। गंगा तट स्थित स्वतंत्रानंद आश्रम में आयोजित इस शिविर में देश-विदेश से बड़ी संख्या में साधक पहुंचे, जबकि डिजिटल माध्यम से लाखों लोगों ने इन सत्रों का लाभ उठाया।
शिविर के दौरान आचार्य प्रशांत ने उपनिषदों की गूढ़ शिक्षाओं को सरल भाषा में प्रस्तुत करते हुए आत्मज्ञान, आंतरिक स्वतंत्रता और जीवन के वास्तविक अर्थ पर गहन विचार रखे। कठोपनिषद और ऋभु गीता के श्लोकों के माध्यम से उन्होंने मनुष्य के भीतर चल रहे द्वंद्व, संबंधों की जटिलता और आधुनिक जीवन की उलझनों पर सशक्त प्रकाश डाला।
अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट कहा कि “अपने आप से मीठे झूठ बोलना पूरी दुनिया के लिए घातक है।” उन्होंने प्रेम को मानवता का मूल बताया और कहा कि “जहां प्रेम होता है, वहां हिंसा का स्थान नहीं होता।” जलवायु संकट को भी उन्होंने मनुष्य की आंतरिक स्थिति से जोड़ते हुए कहा कि “जितनी अधिक बेचैनी और तनाव भीतर होगा, उतनी ही पृथ्वी भी तपेगी।”
आधुनिक जीवनशैली पर सवाल उठाते हुए आचार्य प्रशांत ने ‘पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ के संतुलन’ की अवधारणा को भी भ्रम बताया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति एक ही है, ऐसे में जीवन को कृत्रिम रूप से बांटने की धारणा आत्मविरोध पैदा करती है।
शिविर की एक विशेषता यह रही कि प्रतिदिन प्रातः 4:30 बजे शुरू होने वाले सत्रों में भी प्रतिभागियों की भारी उपस्थिति देखने को मिली। गंगा तट पर आयोजित सामूहिक गतिविधियों में प्रतिभागियों ने कबीर साहब के भजनों का गायन किया और आत्मचिंतन में डूबे रहे। सायंकाल आयोजित पुस्तक हस्ताक्षर कार्यक्रम में भी लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
विदेशों से आए प्रतिभागियों की उपस्थिति ने इस आयोजन को वैश्विक आयाम दिया। ऑस्ट्रेलिया से आए एक साधक ने बताया कि वे पिछले 10 वर्षों से आचार्य प्रशांत के विचारों से जुड़े हैं और हिंदी भाषा न जानने के बावजूद वे पूरे शिविर में गहराई से सहभागी रहे।
शिविर की सफलता ने इसे हाल के वर्षों में ऋषिकेश के प्रमुख आध्यात्मिक आयोजनों में स्थान दिलाया है। यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और जागरूकता का सशक्त मंच बनकर उभरा।
उल्लेखनीय है कि शिविर के समापन के बाद  27 अप्रैल को आचार्य प्रशांत अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश के छात्रों को भी संबोधित किया, जहां वे युवाओं के बीच जीवन, करियर और चेतना के गहरे आयामों पर संवाद किया।


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