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ऋषिकेश में गूंजी संस्कृत की स्वर-लहरियां,  शिक्षा मंत्री ने विशाल संस्कृत शोभायात्रा को दिखाई हरी झंडी  संस्कृत को जन-जन की भाषा बनाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध : धन सिंह रावत  नशामुक्त उत्तराखंड का भी दिलाया संकल्प


ऋषिकेश, 1 सितंबर। संस्कृत सप्ताह के उपलक्ष्य में मंगलवार को ऋषिकेश के  भरत मंदिर में भव्य संस्कृत गोष्ठी एवं विशाल संस्कृत शोभायात्रा का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में ऋषिकेश क्षेत्र के विभिन्न संस्कृत विद्यालयों के प्रबंधकों, प्रधानाचार्यों, शिक्षक-शिक्षिकाओं और छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। 
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद उन्होंने हरी झंडी दिखाकर विशाल संस्कृत शोभायात्रा को रवाना किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि संस्कृत को देववाणी के रूप में संपूर्ण विश्व में प्रतिष्ठा प्राप्त है। संस्कृत के विद्यार्थी और आचार्य इस प्राचीन भाषा के ध्वजवाहक हैं। सरकार का प्रयास है कि संस्कृत केवल विद्यालयों और संस्थानों तक सीमित न रहे, बल्कि यह जन-जन की भाषा बने।
उन्होंने कहा कि संस्कृत उत्तराखंड की द्वितीय राजभाषा है और राज्य सरकार इसके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकार के संकल्प के अनुरूप प्रदेश के प्रत्येक जनपद में संस्कृत ग्राम स्थापित किए गए हैं। संस्कृत ग्रामों में भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए संस्कृत भाषी प्रशिक्षकों की नियुक्ति की गई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी संस्कृत के प्रति रुचि और जागरूकता बढ़ रही है।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और विकास के लिए सरकार द्वारा हर आवश्यक कदम उठाया जाएगा। संस्कृत विद्यालयों एवं संस्कृत शिक्षा से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए भी सरकार गंभीरता से कार्य कर रही है।
शोभायात्रा में दिखी संस्कृत की झलक
मंत्री के हरी झंडी दिखाने के बाद संस्कृत शोभायात्रा निकाली गई। इसमें संस्कृत विद्यालयों के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और संस्कृत प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। शोभायात्रा के दौरान संस्कृत भाषा के संरक्षण और प्रचार-प्रसार का संदेश दिया गया। आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी रही।
नशामुक्त उत्तराखंड का दिलाया संकल्प
संस्कृत शोभायात्रा के दौरान शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने ‘नशामुक्त उत्तराखंड’ अभियान को भी मजबूती देने का आह्वान किया। उन्होंने संस्कृत छात्रों, शिक्षकों और उपस्थित लोगों को नशे से दूर रहने तथा समाज को नशामुक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने की शपथ दिलाई।
इस दौरान मंत्री ने छात्र-छात्राओं से संवाद करते हुए नशे के दुष्प्रभावों और इससे बचाव के उपायों पर चर्चा की। विद्यार्थियों ने नशे से दूर रहने और अपने परिवार तथा समाज को नशामुक्त बनाने में योगदान देने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर नगर निगम ऋषिकेश के महापौर शंभू पासवान, पूर्व महापौर अनीता ममगाईं, जयेंद्र रमोला, दर्शन महाविद्यालय के प्रबंधक संजय शास्त्री, केशव स्वरूप ब्रह्मचारी, गोपालाचार्य महाराज, माध्यमिक संस्कृत शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अनुसूया प्रसाद सुन्दरियाल, प्रदेश महामंत्री डॉ. जनार्दन प्रसाद कैरवान, प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. नवीन पंत, देहरादून जनपद अध्यक्ष सुभाष चंद्र डोभाल, टिहरी जनपद अध्यक्ष डॉ. सुशील कुमार नौटियाल, प्रधानाचार्य डॉ. ओमप्रकाश पूर्वाल, नवीन भट्ट, सुरेंद्र भट्ट, विनायक भट्ट, विजय जुगलान, कृष्ण प्रसाद उनियाल, डॉ. गिरीश पांडेय, डॉ. संतोष मुनि, सुमन झा, नवल किशोर, डॉ. अनिल नौटियाल, मनोज द्विवेदी, विपिन बहुगुणा, जितेंद्र भट्ट, शांति डंगवाल, पूजा वसिष्ठ, हंसराज भट्ट, विकास कोठारी, शांति प्रसाद मैथानी, सुबोध बमोला, लालमणि व्यास सहित विभिन्न संस्कृत विद्यालयों के प्रधानाचार्य, शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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