ऋषिकेश,14 जनवरी।मकर संक्रांति के अवसर पर माया कुण्ड स्थित भगवान गिरी आश्रम में प्रत्येक वर्षों की भांति धार्मिक अनुष्ठान और भंडारा का आयोजन किया गया।
बुधवार को भगवान गिरी आश्रम में आयोजित मकर संक्रांति समारोह के दौरान षड़ दर्शन साधु समाज अखिल भारतीय सनातन धर्म रक्षा समिति के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष बाबा भूपेंद्र गिरी ने मकर संक्रांत का महत्व बताते हुए कहा कि यह पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है और इसे उत्तरायण की शुरुआत के रूप में मनाया जाता है।शास्त्रों के अनुसार उत्तरायण देवताओं का मार्ग माना गया है।
महाभारत में भीष्म पितामह ने उत्तरायण की प्रतीक्षा कर इसी दिन देह त्याग किया था, जिससे इस काल की महत्ता सिद्ध होती है।
सूर्य उपासना: मकर संक्रांति सूर्य देव की आराधना का पर्व है। सूर्य को जीवन, ऊर्जा और स्वास्थ्य का स्रोत माना गया है।
पापों से मुक्ति: मान्यता है कि इस दिन गंगा, यमुना या अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।पूजा-स्नान और दान को पुण्य माना जाता है।
इस अवसर पर उन्होंने साधु संतों महात्माओ और श्रद्वालुओं को भंडारा करा कंबलों का वितरण भी किया गया।
इस मौके पर महामंडलेश्वर ईश्वर दास, मंहत कपिल मुनि, महामंडलेश्वर राघवेन्द्र दास, स्वामी परीक्षित गिरी महाराज, नारायणी महाराज, पार्षद धर्मेश मनचंदा, विनोद शर्मा, मनोहर लाल, जगमोहन विरमानी , गुरप्रीत सिंह, सोनू, विशाल, जतिन विरमानी, आदि मौजूद थे।
Post Views: 27
Leave a Reply