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आदि सनातन धर्म रत्न सम्मान से अलंकृत हुए महामंडलेश्वर डॉ. भूपेंद्र गिरी महाराज, सनातन संस्कृति के संरक्षण और जनजागरण में योगदान को मिला सम्मान, संतों ने गंगा संरक्षण का दिया संदेश


ऋषिकेश। तीर्थनगरी ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन में आयोजित एक भव्य आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक समारोह में निरंजनी अखाड़ा के महामंडलेश्वर डॉ. भूपेंद्र गिरी महाराज को भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं एवं धर्म जागरण के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए “आदि सनातन धर्म रत्न” सम्मान से अलंकृत किया गया। देश-विदेश से आए संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं की उपस्थिति में यह सम्मान प्रदान किया गया।

समारोह के दौरान संत समाज ने कहा कि वर्तमान समय में भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों को संरक्षित एवं प्रचारित करने की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। ऐसे समय में महामंडलेश्वर डॉ. भूपेंद्र गिरी महाराज समाज में आध्यात्मिक चेतना जागृत करने, युवाओं को भारतीय संस्कारों से जोड़ने तथा सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसी योगदान के सम्मान स्वरूप उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया गया।

कार्यक्रम में परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि सनातन धर्म केवल एक आस्था नहीं, बल्कि मानवता, सेवा, करुणा और प्रकृति संरक्षण का जीवन दर्शन है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की जड़ें इतनी गहरी हैं कि यह पूरी दुनिया को शांति, सद्भाव और सहअस्तित्व का संदेश देती है। हमें अपने संस्कारों और आध्यात्मिक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास करने होंगे।

इस अवसर पर ब्रह्मऋषि कुमार स्वामी, निरंजन स्वामी, नेपाल से पधारे स्वामी आनंद अरुण सहित अनेक संतों ने अपने विचार व्यक्त किए। संतों ने मां गंगा के संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन को वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, संस्कृति और जीवन का आधार है। गंगा के बिना भारतीय सभ्यता की कल्पना भी अधूरी है।

संतों ने कहा कि “गंगा जी सबकी हैं और सभी को जीवन प्रदान करती हैं। उन्हें स्वच्छ, निर्मल और अविरल बनाए रखना हम सभी का नैतिक दायित्व है। गंगा संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं का विषय नहीं, बल्कि जनभागीदारी और जनजागरण का अभियान है।”

वक्ताओं ने समाज से प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली अपनाने, नदियों और जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रकृति और संस्कृति दोनों का संरक्षण एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है और यही सनातन जीवन दर्शन का मूल संदेश भी है।

सम्मान ग्रहण करने के पश्चात महामंडलेश्वर डॉ. भूपेंद्र गिरी महाराज ने संत समाज एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान केवल उनका नहीं, बल्कि उन सभी संतों, श्रद्धालुओं और धर्मप्रेमियों का सम्मान है जो सनातन संस्कृति और राष्ट्र निर्माण के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म मानवता, सेवा, सदाचार और विश्व बंधुत्व का संदेश देता है तथा इसे जन-जन तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम के दौरान संतों ने धर्म, संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और गंगा स्वच्छता को लेकर जनजागरण का संकल्प भी लिया। भजन, आध्यात्मिक प्रवचनों और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुए इस आयोजन में बड़ी संख्या में संत, श्रद्धालु एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।


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