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तुलसी जयंती समारोह में चल रही श्री राम कथा का हुआ भव्य समापन, श्रीराम का जीवन केवल कथा नहीं, बल्कि मानवता के लिए एक जीवंत आदर्श : स्वामी कृष्णाचार्य


ऋषिकेश, 19 अगस्त। श्री रामायण प्रचार समिति, ऋषिकेश के तत्वावधान में आयोजित तुलसी जयंती समारोह का बुधवार को श्रीराम कथा का समापन, श्री राम महायज्ञ एवं पूर्णाहुति के साथ समापन हुआ। धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण के बीच आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संत-महंतों, धर्माचार्यों, श्रद्धालुओं तथा नगर के सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने शिरकत कर भगवान श्रीराम का आशीर्वाद प्राप्त किया।

तुलसी जयंती समारोह के अंतर्गत 10 अगस्त से चल रहे विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में श्रीरामचरितमानस के सामूहिक नवाह्न पाठ, सुंदरकांड पाठ, भजन संध्या, श्री राम कथा, श्रीमद्भागवत एवं अन्य आध्यात्मिक आयोजन किए गए। बुधवार को अंतिम दिन प्रातः धार्मिक अनुष्ठानों के बाद श्रीराम महायज्ञ एवं पूर्णाहुति का आयोजन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधि-विधान के साथ यज्ञ में आहुतियां समर्पित की गईं।
कार्यक्रम में संत-महंतों और धर्माचार्यों की उपस्थिति ने समारोह की गरिमा को और बढ़ा दिया।

श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से यज्ञ में सहभागिता की और भगवान श्रीराम से परिवार, समाज एवं देश में सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। इस दौरान पूरे परिसर में श्रीराम के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

समारोह में संतों-महंतों के साथ नगर के सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य लोगों ने भी पहुंचकर धार्मिक आयोजन में सहभागिता की। आयोजकों ने सभी संत-महंतों, श्रद्धालुओं और सहयोगियों का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज को अपनी संस्कृति, संस्कार और सनातन परंपराओं से जोड़ने का कार्य करते हैं।

श्री रामायण प्रचार समिति के अध्यक्ष महंत रवि प्रपन्नाचार्य ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती के अवसर पर आयोजित यह समारोह श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक समरसता का संदेश देता है। श्रीराम कथा और महायज्ञ के माध्यम से लोगों को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में उतारने की प्रेरणा मिलती है।

कार्यक्रम में जगद्गुरु रामानुजाचार्य उत्तराखंड पीठाधीश्वर 1008 श्री स्वामी कृष्णाचार्य महाराज की पावन अध्यक्षता रही।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि श्रीराम का जीवन केवल कथा नहीं, बल्कि मानवता के लिए एक जीवंत आदर्श है। उन्होंने कहा कि “राम नाम का स्मरण ही जीवन को पवित्र करता है और मनुष्य को धर्म, सत्य और करुणा के मार्ग पर अग्रसर करता है। यज्ञ केवल अग्नि में आहुति देना नहीं, बल्कि अपने भीतर की बुराइयों का त्याग कर आत्मशुद्धि का संकल्प लेना है।”

उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे श्रीराम के आदर्शों को अपने आचरण में उतारें और समाज में सद्भाव एवं सेवा की भावना को बढ़ाएं।

वहीं रामकथा एवं धार्मिक अनुष्ठानों में युवराज स्वामी गोपालाचार्य महाराज तथा पं. वेद प्रकाश मिश्रा सहित संत-महात्माओं ने सहभागिता की।

समापन अवसर पर आयोजित भंडारे में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।


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