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1955 से स्थापित सुभाष बनखंडी श्री रामलीला कमेटी में गूंजेगा ‘जय श्रीराम’, 7 से 21 अक्टूबर तक होगा रामलीला का भव्य मंचन, 66वीं रामलीला में डिजिटल एलईडी गेट और चलित बैकग्राउंड बनेगा आकर्षण, महिला मंडल द्वारा घर-घर पहुंचा जा रहा रामलीला और सनातन संस्कृति का प्रचार-प्रसार


ऋषिकेश, 3 अक्टूबर। धर्मनगरी ऋषिकेश के सुभाष बनखंडी स्थित रामलीला प्रांगण में एक बार फिर भगवान श्रीराम के आदर्शों और रामचरितमानस के दिव्य प्रसंगों की गूंज सुनाई देगी। सुभाष बनखंडी श्री रामलीला कमेटी की ओर से आगामी 7 से 21 अक्टूबर 2026 तक श्री रामचरितमानस की 66वीं रामलीला का भव्य मंचन किया जाएगा। रामलीला मंचन की तैयारियों, कार्यक्रमों और व्यवस्थाओं की रूपरेखा साझा करने के लिए शनिवार को रामलीला प्रांगण में पत्रकार वार्ता आयोजित की गई।

पत्रकार वार्ता में कमेटी अध्यक्ष अशोक थापा, महामंत्री योगेश कालड़ा एवं कोषाध्यक्ष रणवीर सिंह पाल ने संयुक्त रूप से बताया कि वर्ष 1955 से संचालित सुभाष बनखंडी श्री रामलीला कमेटी द्वारा प्रत्येक वर्ष रामलीला का मंचन किया जाता रहा है।

इस वर्ष भी स्थानीय कलाकार भगवान श्रीराम के जीवन चरित्र और रामचरितमानस के विभिन्न प्रसंगों को जीवंत करेंगे।

कमेटी पदाधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष रामलीला मंचन को और अधिक भव्य एवं आकर्षक स्वरूप देने के लिए पहली बार डिजिटल एलईडी गेट और बैकग्राउंड में चलित चित्रों का प्रयोग किया जाएगा। इससे दर्शकों को रामलीला के विभिन्न प्रसंगों का प्रभावशाली एवं आधुनिक तकनीक से सुसज्जित दृश्यावलोकन देखने को मिलेगा।

कमेटी की ओर से इस वर्ष एक महिला मंडल का गठन भी किया गया है। महिला मंडल द्वारा घर-घर जाकर रामलीला और सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार के साथ युवाओं एवं बच्चों को भगवान श्रीराम के आदर्श चरित्र और रामचरितमानस के प्रसंगों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

कमेटी के अनुसार 7 अक्टूबर को गणेश पूजन, श्रवण कुमार, राजा दशरथ संवाद तथा कैलाश लीला के साथ रामलीला का शुभारंभ होगा। 8 अक्टूबर को गणेश वंदना, मंथरा-कैकेयी प्रसंग, श्रीराम वनवास एवं मंथरा लीला का मंचन होगा। 9 अक्टूबर को सीता जन्म, राम जन्म, ताड़का वध, सुबाहु वध एवं अहिल्या उद्धार के प्रसंग प्रस्तुत किए जाएंगे।
10 अक्टूबर को पुष्पवाटिका, सीता स्वयंवर, राम-लक्ष्मण संवाद एवं परशुराम संवाद, 11 अक्टूबर को श्रीराम वनवास तथा 12 अक्टूबर को श्रीराम वन गमन लीला का मंचन होगा। 13 अक्टूबर को शूर्पणखा प्रसंग, खर-दूषण वध, सीता हरण एवं जटायु प्रसंग प्रस्तुत किए जाएंगे।
14 अक्टूबर को पंचवटी, खर-दूषण वध एवं मारीच की कुटिया, 15 अक्टूबर को सीता हरण एवं जटायु मरण तथा 16 अक्टूबर को शबरी मिलन, राम-सुग्रीव मित्रता, बाली वध एवं सीता की खोज के प्रसंग मंचित होंगे।
17 अक्टूबर को अशोक वाटिका, हनुमान-रावण संवाद एवं लंका दहन दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहेगा। 18 अक्टूबर को विभीषण शरणागत, सेतुबंध, रामेश्वर पूजा एवं रावण-अंगद संवाद तथा 19 अक्टूबर को सुलोचना महल एवं लक्ष्मण शक्ति का मंचन होगा।
20 अक्टूबर को रावण वध, 21 को भरत मिलाप के साथ समापन
रामलीला के सबसे प्रमुख प्रसंगों में 20 अक्टूबर को मेघनाद वध, कुंभकर्ण वध, रावण वध एवं राम विजय का मंचन किया जाएगा। वहीं 21 अक्टूबर को भरत मिलाप, श्रीराम राज्याभिषेक, रंगारंग कार्यक्रम एवं पुरस्कार वितरण के साथ 66वीं रामलीला का भव्य समापन होगा।

कमेटी ने बताया कि आवश्यकता के अनुसार कार्यक्रम की रूपरेखा में परिवर्तन किया जा सकता है। रामलीला मंचन के दौरान मंच पर किसी भी प्रकार के अतिरिक्त कार्यक्रम के लिए एक दिन पूर्व अध्यक्ष अथवा महामंत्री से संपर्क करना आवश्यक होगा।

कमेटी ने स्पष्ट किया कि रामलीला प्रांगण में नशीले पदार्थों का सेवन पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।
नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

कमेटी पदाधिकारियों ने नगरवासियों एवं श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि सुभाष बनखंडी, ऋषिकेश स्थित रामलीला प्रांगण में आयोजित इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक महोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर भगवान श्रीराम के आदर्शों से प्रेरणा लें और रामलीला मंचन के साक्षी बनें।


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