ऋषिकेश, 14 मार्च। रायवाला स्थित ड्रीम वेडिंग पॉइंट में शनिवार को रामायण रिसर्च काउंसिल उत्तराखंड प्रदेश की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता उत्तराखंड प्रदेश संयोजक एवं ऋषिकेश नगर निगम की पूर्व महापौर अनिता ममगाईं ने की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं ने “सीता सखी” के रूप में संगठन से जुड़कर सनातन संस्कृति के संरक्षण और प्रसार का संकल्प लिया।
बैठक को संबोधित करते हुए अनिता ममगाईं ने कहा कि माता सीता त्याग, सहनशीलता और मर्यादा की प्रतीक हैं। उन्हें जनकनंदिनी और मां जानकी के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने कहा कि माता जानकी केवल मिथिला की पुत्री ही नहीं बल्कि समस्त नारी जाति के गौरव की प्रतीक हैं।
उन्होंने महिलाओं से आह्वान किया कि अधिक से अधिक संख्या में “सीता सखी” के रूप में संगठन से जुड़ें और सनातन संस्कृति को मजबूत बनाने में योगदान दें। ममगाईं ने बताया कि आगामी 25 अप्रैल को बिहार के सीतामढ़ी में मां जानकी के भव्य मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें उत्तराखंड से भी बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष सीता सखी के रूप में शामिल होंगे।
उन्होंने कहा कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर अयोध्या के निर्माण के बाद अब मां जानकी के भव्य मंदिर का निर्माण होना हम सभी के लिए गर्व और खुशी की बात है। माता जानकी का जीवन त्याग, समर्पण और तपस्या का अद्भुत उदाहरण है, जिससे समाज को प्रेरणा लेनी चाहिए।
बैठक में बताया गया कि माता जानकी मिथिला के राजा जनक की पुत्री, भगवान भगवान राम की पत्नी और देवी लक्ष्मी का अवतार मानी जाती हैं। उनका प्राकट्य बिहार के पुनौरा धाम (सीतामढ़ी) में भूमि से हुआ था, इसलिए उन्हें ‘भूमिजा’ भी कहा जाता है।
कार्यक्रम के संयोजक कृपाल सिंह बिष्ट रहे। बैठक में पूर्व ब्लॉक प्रमुख भगवान सिंह पोखरियाल, जिला पंचायत सदस्य दिव्या बेलवाल, ग्राम प्रधान शैलेन्द्र रंगन, राजेश जुगरान, बिना बगवाल, कमलेश भंडारी, कुंवर सिंह नेगी, गीता रावत, रमेश रयाल, मान सिंह, गौरव भंडारी, सीपी ममगाईं, राकेश रावत, सुनील पेटवाल, देवानंद बडोनी, रमेश कंडारी, राकेश पोखरियाल, बीना नेगी, रमा कुकशाल, प्रमोद धनाई, प्रीति रावत सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि संगठन का उद्देश्य सनातन संस्कृति को सशक्त बनाना, नई पीढ़ी को संस्कारित करना और देश की सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण करना है। इसके लिए काउंसिल की टीम साहित्यिक सृजन, चिंतन और संतों के मार्गदर्शन में लगातार कार्य कर रही है।
रायवाला में रामायण रिसर्च काउंसिल की बैठक, मां जानकी त्याग और मर्यादा की प्रतीक: अनिता ममगाईं












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