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ऋषिकेश में ई-बसों के संचालन किए जाने को लेकर छोटे परिवहन व्यवसाईयों ने जताया कड़ा विरोध, 24 जनवरी को 6500 वाहनों की रैली होगी सड़कों पर


ऋषिकेश 18 जनवरी। तीर्थ नगरी ऋषिकेश में शहरी क्षेत्र विकास एजेंसी एवं नगर निगम ऋषिकेश द्वारा ई-बसों के संचालन किए जाने को लेकर उत्तराखंड विक्रम ऑटो रिक्शा, ई-ऑटो रिक्शा महासंघ ने इसका विरोध जताया है।

रविवार को आईएसबीटी स्थित एक होटल में महासंघ के पदाधिकारियों द्वारा आयोजित प्रेस कांफ्रेंस के दौरान पत्रकारों को संबोधित करते हुए महासंघ के प्रदेशध्यक्ष महंत विनय सारस्वत ने कहा कि महासंघ ने सरकार और प्रशासन को छह दिन का समय देते हुए चेतावनी दी है कि यदि ई-बस संचालन पर रोक नहीं लगाई गई तो 24 जनवरी को आईडीपीएल ग्राउंड से करीब 6500 वाहनों की रैली निकाली जाएगी। इसके बाद सभी वाहन नगर निगम परिसर में खड़े किए जाएंगे। यह सभी वाहन तब तक नगर निगम में खड़े रहेंगे जब तक सरकार और प्रशासन द्वारा नगर में ई बसों के संचालन को पूर्ण तरह रोक नहीं लगती है। उन्होंने इसे विक्रम टेंपो , ऑटो, ई ऑटो रिक्शा से जुड़े सभी व्यवसाईयों का उत्पीड़न बताया है।
उन्होंने बोला कि हरिद्वार से लक्ष्मण झूला तक 27 ई-बसें चलाने का निर्णय सीधे तौर पर छोटे परिवहन व्यवसायियों पर कुठाराघात है। उन्होंने बताया कि ऋषिकेश क्षेत्र में वर्तमान में करीब 1800 विक्रम, 3000 ऑटो और लगभग 1500 ई-रिक्शा संचालित हैं, जिनसे हजारों परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। सरकार का यह फैसला गरीब वाहनों के अस्तित्व पर संकट खड़ा कर रहा है।उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन गांधीवादी तरीके से किया जाएगा और किसी भी तरह की हिंसा या अव्यवस्था नहीं होने दी जाएगी।

इसी क्रम में उत्तराखंड परिवहन महासंघ के अध्यक्ष सुधीर राय रावत ने कहा कि ऋषिकेश चारधाम यात्रा का मुख्य प्रवेश द्वार है, जहां पहले से ही यातायात का भारी दबाव रहता है। उन्होंने कहा कि शहर में पार्किंग और सड़क की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, ऐसे में 27 ई-बसों का संचालन दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि चार धाम यात्रा का प्रवेश द्वार ऋषिकेश करीब आठ किलोमीटर की दूरी पर बसा है, इसके बावजूद शासन प्रशासन की ओर से शहर के भीतर यातायात का अनावश्यक बोझ बढ़ाया जा रहा है।

महासंघ के नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार का यह निर्णय शहर में अतिक्रमण और जाम की स्थिति को और गंभीर करेगा। उन्होंने मांग की कि छोटे परिवहन व्यवसायियों के हितों को ध्यान में रखते हुए ई-बस संचालन के निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए।

इस अवसर पर सुनील कुमार, विजेंद्र कंडारी, कमल सिंह राणा, राजेंद्र लांबा, संजय शर्मा, मुकेश तिवारी, जगजीत सिंह जग्गा, रवि गोस्वामी, सतीश नेगी, अश्वनी कुमार, कृष्णपाल, दीपेश कुमार सहित कई पदाधिकारी और वाहन चालक मौजूद थे।


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