बापू ग्राम को राजस्व ग्राम घोषित करने और वन विभाग द्वारा कब्जाई जमीन लौटाने की मांग सदन में उठी


गैरसैंण/ऋषिकेश, 10 मार्च। गैरसैंण (भराड़ीसैंण) में चल रहे उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान ऋषिकेश  विधायक प्रेम चंद अग्रवाल ने ऋषिकेश विधानसभा क्षेत्र के बापू ग्राम सहित अन्य क्षेत्रों में वन विभाग द्वारा की जा रही कार्रवाई का मुद्दा जोरदार तरीके से सदन में उठाया। उन्होंने सरकार से बापू ग्राम को राजस्व ग्राम घोषित करने और जिन लोगों की जमीन वन विभाग ने अपने कब्जे में ली है, उन्हें वापस दिलाने की मांग की।

सदन में प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि बापू ग्राम का मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है। वर्ष 2018 में इस क्षेत्र को नगर पालिका ऋषिकेश के क्षेत्राधिकार में शामिल किया गया था, जिसके बाद यहां के कई वार्ड नगर निगम के अंतर्गत आ गए हैं।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार बापू ग्राम क्षेत्र की जनसंख्या लगभग 25 हजार थी, लेकिन वर्तमान में यहां की आबादी तेजी से बढ़ चुकी है। अनुमानतः अब यहां लगभग 15 हजार परिवार और करीब 60 हजार लोग स्थायी और अस्थायी रूप से निवास कर रहे हैं। इसके बावजूद वन विभाग इस क्षेत्र को बार-बार फॉरेस्ट क्षेत्र बताते हुए कार्रवाई कर रहा है, जिससे स्थानीय लोगों में असमंजस और चिंता का माहौल बना हुआ है।
विधायक प्रेमचंद अग्रवाल ने सदन को अवगत कराया कि कुल लगभग 2866 एकड़ भूमि का मामला माननीय सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। इसमें से करीब 2287.10 एकड़ भूमि पर एम्स ऋषिकेश, आईडी पीएल, सिंचाई विभाग, ऊर्जा विभाग, औद्योगिक विभाग सहित विभिन्न सरकारी संस्थान और कॉलोनियां स्थापित हैं, जबकि शेष लगभग 578.90 एकड़ भूमि पर लंबे समय से स्थानीय लोग निवास कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आजादी से पूर्व इस क्षेत्र में रहने वाले लोग खेती-किसानी कर अपनी आजीविका चलाते थे। महात्मा गांधी के शिष्य मीराबेन के प्रयासों से सरकार द्वारा उन्हें भूमि उपलब्ध कराई गई थी। वर्ष 1950 में यहां कृषि सहकारी समिति का गठन किया गया और लगभग 39 एकड़ भूमि पर छोटे-छोटे आवासीय भूखंड आवंटित किए गए। उस समय लोगों को करीब 200-200 गज भूमि दी गई, जिसमें से 100 गज में उन्होंने आवास बनाए और शेष भूमि पर खेती कर अपने परिवार का भरण-पोषण किया।
उन्होंने कहा कि वन विभाग द्वारा नई नीति के तहत कई जमीनों को वन भूमि घोषित कर दिया गया है, जिससे यहां के निवासियों को बेदखली का सामना करना पड़ रहा है और उनका जीवन-यापन कठिन हो गया है। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में अधिकांश लोग पर्वतीय क्षेत्रों से आकर बसे हैं और कई परिवार पिछले 75-80 वर्षों से यहां निवास कर रहे हैं।

उन्होंने सरकार से मांग की कि बापू ग्राम क्षेत्र को राजस्व ग्राम घोषित किया जाए तथा जिन लोगों की जमीन वन विभाग ने अपने कब्जे में ले ली है, उन्हें वापस की जाए। साथ ही यहां निवास कर रहे लोगों को उनकी भूमि का वैध मालिकाना हक दिया जाए, ताकि उन्हें स्थायी  राहत मिल सके।
प्रेम चंद अग्रवाल ने कहा कि यह अत्यंत महत्वपूर्ण और जनहित से जुड़ा विषय है, इसलिए सरकार को इस मामले में संवेदनशीलता के साथ सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए, ताकि वर्षों से यहां रह रहे लोगों के हितों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।


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