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धर्म का अर्थ अनुभव है, केवल कर्मकांड नहीं, ईश्वर बाहर नहीं, भीतर है : मंहत कपिल मुनि कबीर‌‌ चौरा आश्रम के‌ संस्थापक ब्रह्मलीन महंत प्रदीप दास की छठी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि समारोह हुआ आयोजित


ऋषिकेश ,06 जनवरी। कबीर‌‌ चौरा आश्रम के‌ संस्थापक ब्रह्मलीन महंत प्रदीप दास की छठी पुण्यतिथि एवं श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया गया।
मंगलवार को लक्ष्मण झूला मार्ग स्थित कबीर चौरा आश्रम में आश्रम के संस्थापक ब्रह्मलीन महंत प्रदीप दास महाराज की षष्ठम् निर्वाण दिवस स्मृति समारोह विधि विधान से मनाया गया। इस अवसर पर एक श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया। श्रद्धांजलि समारोह मे आए सभी संतों महंतों ने ब्रह्मलीन महंत प्रदीप दास महाराज के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। साथ ही जगतगुरु कबीर साहब महाराज के वाणी बीजक पाठों एवं अमृतमयी वाणी आरती शब्द कीर्तन भी किया गया ।
इस मौके पर कबीर चौरा आश्रम‌ के मंहत कपिल मुनि ने ‌कहा कि वह जगद्गुरु कबीर साहब के बताएं गई बातों का ही अनुसरण करते हैं। उनके अनुसार धर्म का अर्थ अनुभव है, केवल कर्मकांड नहीं, ईश्वर बाहर नहीं, भीतर है । प्रेम सत्य और विवेक ही साधना का पथ है।
उन्होंने कबीर साहिब की पंक्ति—
“पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय।”
का अर्थ बताया कि
केवल किताबें (पोथियाँ) पढ़ते-पढ़ते ही लोग जीवन बिता देते हैं, लेकिन सिर्फ पढ़ लेने से कोई सच्चा पंडित (ज्ञानी) नहीं बनता।
अतः सच्चा ज्ञान अनुभव और आचरण से आता है, न कि केवल पढ़ाई से।
जो व्यक्ति ज्ञान को जीवन में उतारता है, वही वास्तव में ज्ञानी है।
बाहरी विद्या, शास्त्र या ग्रंथ तब तक अधूरे हैं, जब तक उनसे आत्म-बोध, प्रेम और सत्य न जागे।किताबें पढ़ना ज़रूरी है, लेकिन उनसे सीखी बातों को जीना उससे भी ज़्यादा ज़रूरी है।
इस अवसर पर महामंडलेश्वर योगीराज आशुतोष,महंत दिनेश दास शास्त्री, महंत सुदीक्षण मुनी, महंत बलवीर सिंह, महंत अनंतानंद, महंत रवि शास्त्री, महंत विनय सारस्वत, पूर्व महापौर अनीता ममगाईं सहित काफी संख्या में संत महंत उपस्थित थे।


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