ऋषिकेश, 19 फरवरी। नगर निगम ऋषिकेश के अंतर्गत वार्ड नंबर 12 स्थित प्रगति विहार कॉलोनी में इन दिनों नगर निगम द्वारा नालियों के निर्माण और मरम्मत का कार्य कराया जा रहा है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि अप्रैल 2025 में गली नंबर 9 में नालियों का निर्माण करते समय उनका ढाल विपरीत दिशा में कर दिया गया था, जिससे पानी की निकासी स्वाभाविक मार्ग के बजाय वन विभाग परिसर की ओर मोड़ दी गई। इसके लिए वन विभाग की दीवार को तोड़कर निकासी मार्ग बनाया गया था।
अब इसी तर्ज पर गली नंबर 10 में भी पूर्व निर्मित नाली के ढाल को बदलते हुए उसकी निकासी वन विभाग परिसर में करने की योजना प्रस्तावित बताई जा रही है। इस प्रस्ताव का स्थानीय नागरिकों ने तीखा विरोध किया है। उनका कहना है कि यह न केवल पर्यावरणीय दृष्टि से अनुचित है, बल्कि भविष्य में कानूनी जटिलताओं और प्रशासनिक कार्रवाई का कारण भी बन सकता है।
स्थानीय निवासियों ने इस संबंध में वन क्षेत्राधिकारी, नगर आयुक्त तथा उत्तराखण्ड वन विभाग के मुख्य वन संरक्षक को लिखित शिकायत प्रेषित की है। साथ ही नगर निगम के महापौर शम्भू पासवान को भी मौके पर बुलाकर वस्तुस्थिति से अवगत कराया गया।
निवासियों का कहना है कि यदि वन विभाग ने नियमानुसार भूमि अतिक्रमण या अवैध निकासी को लेकर कार्रवाई की तो कॉलोनीवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने मांग की है कि नालियों की निकासी का स्थायी और वैधानिक समाधान खोजा जाए तथा वन भूमि का उपयोग बिना अनुमति के न किया जाए।
शिकायत पत्र भेजने वालों में राजेन्द्र बिजल्वाण, अमित कुमार, प्रकाश चन्द्र, रवि प्रसाद, सीमा शर्मा और निवेदिता खण्डूरी सहित अनेक स्थानीय नागरिक शामिल हैं।
इस प्रकरण ने नगर निगम और वन विभाग के बीच समन्वय की कमी को भी उजागर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी विकास कार्यों में पर्यावरणीय और विधिक पहलुओं की अनदेखी भविष्य में गंभीर परिणाम ला सकती है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है और स्थानीय निवासियों की आशंकाओं का समाधान किस प्रकार किया जाता है।














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