ऋषिकेश 4 अप्रैल। उत्तराखंड एसटीएफ और साइबर क्राइम पुलिस ने सीनियर सिटिजन को “डिजिटल अरेस्ट” का भय दिखाकर 69 लाख रुपये की ठगी करने वाले साइबर गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, जबकि गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।
एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने बताया कि ऋषिकेश निवासी बी.एन. झा ने साइबर थाना देहरादून में शिकायत दर्ज कराई थी कि अज्ञात साइबर अपराधियों ने व्हाट्सएप कॉल कर उन्हें ठगी का शिकार बनाया। ठगों ने खुद को दिल्ली के दरियागंज थाने का पुलिस इंस्पेक्टर और अदालत का जज बताते हुए पीड़ित को डराया कि उनके आधार कार्ड का दुरुपयोग मनी लॉन्ड्रिंग में किया गया है और वे एक गंभीर मामले में फंस सकते हैं।
साइबर अपराधियों ने पीड़ित को “डिजिटल अरेस्ट” में होने का भय दिखाकर उनसे लगातार संपर्क बनाए रखा और संपत्ति सत्यापन, एनओसी जारी करने तथा जमानत की प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में कुल 69 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर थाना देहरादून और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि आरोपी भगवत सरन ने अपने साथियों के साथ मिलकर लालकुआं (नैनीताल) स्थित एक्सिस बैंक में “रुद्रा टेलीकॉम” के नाम से फर्जी जमानत पत्र और फीस रसीद के आधार पर बैंक खाता खुलवाया था। इसी खाते के माध्यम से ठगी की रकम का लेन-देन किया जा रहा था।
जांच के दौरान यह भी पता चला कि इस बैंक खाते के खिलाफ नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग (एनसीआरपी) पोर्टल पर पहले से ही 30 शिकायतें दर्ज हैं। पीड़ित बी.एन. झा से ठगे गए 69 लाख रुपये में से 6 लाख रुपये भी इसी खाते में जमा किए गए थे।
एसटीएफ टीम ने कार्रवाई करते हुए 2 अप्रैल 2026 को आरोपी भगवत सरन को रुद्रपुर से गिरफ्तार कर लिया। उसे साइबर थाना देहरादून लाकर पूछताछ की गई और बाद में न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से बैंक खाते से जुड़े मोबाइल नंबर, दो डेबिट कार्ड और अन्य महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य भी बरामद किए हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के लिए टीमें लगातार प्रयास कर रही हैं।
पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें या नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई कर पीड़ित की सहायता की जा सके।












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