चारधाम यात्रा से पहले ऋषिकेश देहरादून में मेगा मॉक ड्रिल, आपदा से निपटने की तैयारियों का लिया गया जायजा


ऋषिकेश, 10 अप्रैल। आगामी चारधाम यात्रा-2026 के दौरान संभावित आपदाओं और आकस्मिक परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए शुक्रवार को जनपद देहरादून ऋषिकेश में मेगा मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। यह व्यापक अभ्यास राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) और उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) के तत्वावधान में जिले के चार प्रमुख स्थलों पर एक साथ संचालित किया गया।
मॉक ड्रिल की शुरुआत सुबह 9:45 बजे जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र से विभिन्न आपदा परिदृश्यों की सूचना प्रसारित कर की गई। अभ्यास के तहत ऋषिकेश यात्रा ट्रांजिट कैंप में आग लगने, मौसम विभाग द्वारा रेड अलर्ट जारी होने के बाद तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ जुटने तथा देहरादून स्थित रिस्पना नदी में बादल फटने से आई बाढ़ जैसी आपात स्थितियों को दर्शाया गया। इसके अलावा गांधी शताब्दी अस्पताल में घायलों के उपचार और आपात चिकित्सा व्यवस्था का भी परीक्षण किया गया।
जिलाधिकारी एवं रिस्पांसिबल ऑफिसर सविन बंसल के निर्देश पर अपर जिलाधिकारी (वि.रा.) के.के. मिश्रा ने कंट्रोल रूम से पूरे अभ्यास की कमान संभाली। उन्होंने सभी इंसीडेंट कमांडरों को निर्देश देते हुए स्टेजिंग एरिया से रेस्क्यू टीमों को तत्काल घटनास्थलों के लिए रवाना करने को कहा। निर्देश मिलते ही टीमें त्वरित गति से मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव कार्य प्रारंभ किया गया।
ऋषिकेश ट्रांजिट कैंप में आग लगने की घटना के परिदृश्य में पूरे कैंप को सुरक्षित रूप से खाली कराया गया। अभ्यास के दौरान पांच यात्रियों को गंभीर रूप से घायल दर्शाया गया, जिन्हें एंबुलेंस के माध्यम से एम्स ऋषिकेश भेजा गया, जबकि 12 अन्य घायलों को मौके पर ही प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया गया। अग्निशमन विभाग ने तत्परता दिखाते हुए आग पर शीघ्र काबू पाया और स्थिति को नियंत्रित किया।
वहीं रेड अलर्ट के चलते ट्रांजिट कैंप में बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन द्वारा यात्रियों को व्यवस्थित रूप से राहत शिविरों, होटलों और धर्मशालाओं में स्थानांतरित करने की व्यवस्था का भी अभ्यास किया गया, जिससे भीड़ प्रबंधन की रणनीति को परखा जा सके।
तीसरे परिदृश्य में रिस्पना नदी में आई बाढ़ के दौरान एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान चलाया। इस दौरान चार लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू कर अस्पताल पहुंचाया गया तथा प्रभावितों को राहत शिविरों में ठहराकर भोजन, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। साथ ही लोगों को नदी किनारे जाने से बचने की हिदायत दी गई।
मॉक अभ्यास के बाद इंसीडेंट कमांडरों ने रेस्क्यू टीमों की ब्रीफिंग कर भविष्य में अधिक सतर्कता, बेहतर समन्वय और त्वरित कार्रवाई के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान मौजूद आब्जर्वरों ने अभ्यास के दौरान सामने आई कमियों को दूर करने पर विशेष जोर दिया।
एनडीएमए के विशेषज्ञों ने मॉक ड्रिल को सफल बताते हुए कहा कि सभी टीमों ने अपने दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन किया। उन्होंने आपदा प्रबंधन प्रणाली को और मजबूत बनाने के लिए बेहतर समन्वय, सुदृढ़ संचार व्यवस्था और त्वरित निर्णय क्षमता विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
मॉक अभ्यास के दौरान कंट्रोल रूम में अपर जिलाधिकारी (वि.रा.) के.के. मिश्रा, उप जिलाधिकारी कुमकुम जोशी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज कुमार शर्मा, जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार, जिला पूर्ति अधिकारी केके अग्रवाल, सीईओ वीके ढौडियाल, डीपीओ जीतेन्द्र कुमार, डीआईओ एनआईसी अंकुश पांडेय और जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ऋषभ कुमार सहित आर्मी, आईटीबीपी, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, होमगार्ड तथा अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।


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