प्रोजेक्ट ब्लू के माध्यम से मुम्बई के समुद्र को स्वच्छ करने के अभियान को लेकर परमार्थ में किया गया मंथन


 

ऋषिकेश, 19 अप्रैल। परमार्थ निकेतन में प्रोजेक्ट ब्लू के माध्यम से मायानगरी मुम्बई के समुदों को स्वच्छ करने हेतु अभियान चलाने वाले विवेकानन्द यूथ कनेक्ट फाउंडेशन के संस्थापक डाॅ राजेश सर्वज्ञ और उनकी टीम आयी। राजेश सर्वज्ञ के मार्गदर्शन में प्रोजेक्ट ब्लू की टीम में परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती से भेंटवार्ता की।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने डाॅ राजेश सर्वज्ञ से समुद्र में बढ़ते प्लास्टिक पर चिंता व्यक्त करते हुये कहा कि प्लास्टिक का बढ़ता प्रयोग पर्यावरण विकास और जीवन विकास की प्रक्रिया में बाधक है। हम सभी को धरती की हरियाली और खुशहाल के लिये सोचसमझ कर प्लास्टिक का विवेकपूर्ण इस्तेमाल करना होगा। साथ ही प्लास्टिक आदि कचरे का बेहतर प्रबंधन करना होगा तभी हम अपने समुद्रों और धरती को प्रदूषणमुक्त रख सकते हैं।
स्वामी ने कहा कि प्लास्टिक के अंधाधुंध और अवैज्ञानिक प्रयोग पर्यावरण के लिये एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है। दुनिया भर में हर साल लाखों टन प्लास्टिक का उत्पादन होता है। इसमें सिर्फ 9 फीसदी ही रिसाइकिल होता है। 12 फीसदी जला दिया जाता है जो हमारी हवा को जहरीला बनाता है, जबकि 79 फीसदी प्लास्टिक कचरा इधर-उधर बिखर कर हमारे पर्यावरण को दूषित करता है। इसका बुरा प्रभाव समुद्री जीव-जंतुओं पर पड़ रहा है। अगर प्लास्टिक का सही तरह से निपटारा नहीं किया गया तो 2050 तक हमारे आसपास 1 अरब 20 करोड़ टन प्लास्टिक कचरा जमा हो जाएगा। स्वामी ने डाॅ राजेश सर्वज्ञ से कहा कि समुद्रों की सफाई के साथ-साथ जन समुदाय को एकल उपयोग प्लास्टिक का उपयोग न करने हेतु जागरूक करना होगा। आंकडों के अनुसार भारत में हर साल प्रति व्यक्ति प्लास्टिक प्रयोग करीब 13 किलोग्राम है। प्लास्टिक के सही इस्तेमाल को लेकर जनता के बीच जागरूकता बढ़ाए जाने की जरूरत है।
स्वामी जी ने कहा कि हमें बेहतर वेस्ट मैनेजमेंट तकनीक के इस्तेमाल पर जोर जोर देना होगा तथा बायोडीग्रेडेबल पॉलीमर के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की जरूरत है। समुद्र में प्लास्टिक के बढ़ते ढेर को लेकर चिंता व्यक्त करते हुये कहा कि हम अपनी धरा को स्वस्थ, समृद्धि और प्रदूषण मुक्त रखना चाहते है तो प्लास्टिक को समुद्र में जाने से रोकना होगा।
स्वामी जी ने कहा कि प्लास्टिक के बढ़ते प्रयोग के कारण प्रकृति में कई नकारात्मक बदलाव हो रहे है। प्लास्टिक हमारी मिट्टी, समुद्र और हमारे शरीर को नुकसान पहुँचाता है। प्लास्टिक की थैलियाँ खाने से प्रतिवर्ष तकरीबन एक लाख से अधिक पशु-पक्षी मर जाते हैं। समुद्र के अलावा यह जहरीला प्लास्टिक मिट्टी की उर्वरा शक्ति को भी खत्म करता है क्योंकि इसके जलने से जहाँ जहरीली गैस निकलती है वहीं यह मिट्टी में पहुँच कर भूमि की उर्वरा शक्ति को नष्ट करता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, प्लास्टिक के नष्ट होने में 500 से 1000 साल का वक्त लगता है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि जन जागरूकता लाकर प्लास्टिक की वजह से पर्यावरण को हो रहे नुकसान को कम किया जा सकता है।

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