प्रसिद्ध अस्पताल में इलाज के दौरान महिला की मौत के मामले में अस्पताल प्रशासन पर लगा लापरवाही का आरोप, राज्य उपभोक्ता आयोग ने पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने के दिए आदेश
ऋषिकेश 30 नवंबर। प्रसिद्ध अस्पताल में इलाज के दौरान महिला की मौत के मामले में अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल प्रशासन को आखिरकार 10 वर्ष लंबे संघर्ष के बाद राज्य उपभोक्ता आयोग ने पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने के आदेश दिए हैं।
रविवार को देहरादून रोड स्थित एक होटल में पत्रकार वार्ता के दौरान पत्रकारों को संबोधित करते हुए संदीप गुप्ता, सावन वर्मा, राजीव शर्मा, विवेक गौड़, ने बताया कि हरिधाम कॉलोनी, ऋषिकेश निवासी शकुंतला देवी की 14 अप्रैल 2014 को देहरादून के मैक्स अस्पताल में सर्जरी होनी थी। जिसके लिए मृतक के बेटे संदीप गुप्ता के मुताबिक सर्जरी से पहले कार्डियक क्लीयरेंस के लिए, उन्हें डोबुटामाइन स्ट्रेस इको (डीएसई) टेस्ट कराने की सलाह दी गई थी। 12 अप्रैल 2014 को डॉ. अमित राणा ने यह टेस्ट किया तो उनकी मां को कार्डियक अरेस्ट हो गया। इसके बाद, शकुंतला देवी कोमा में चली गईं और 13 मई 2014 को उनका निधन हो गया। पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन द्वारा उनको कुल ऑपरेशन का खर्चा 1,65,000 पर बताया गया था जबकि उनको 5,65,000 रुपए का बिल थमा दिया गया।
संदीप गुप्ता ने अस्पताल, डॉ. अमित, राणा, डॉ एके सिंह, डॉ प्रीति शर्मा, डॉ पुनीश सडाना के खिलाफ आयोग में इलाज में लापरवाही का वाद दायर किया था। राज्य उपभोक्ता आयोग ने अस्पताल और डॉ. राणा को लापरवाही का दोषी मानते हुए पीड़ित परिवार को ₹10 लाख रुपए का मुआवजा और मुकदमा खर्च देने के आदेश दिए।
संदीप गुप्ता ने बताया कि वैसे तो डॉक्टर भगवान होते हैं लेकिन कई डॉक्टरों के लापरवाही के कारण मरीजों की जान चली जाती है। डॉक्टर के ऊंची पहुंच होने के कारण लापरवाही होने पर भी उनके खिलाफ पीड़ित आवाज नहीं उठा पाते हैं। अगर कोई चिकित्सक लापरवाही करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई जरूर होनी चाहिए। ताकि वह चिकित्सक आगे कोई लापरवाही न कर पाए।
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