चार साल बाद लौटा टिहरी लेक फेस्टिवल,  मुख्यमंत्री ने किया भव्य उद्घाटन, कोटी कालोनी–नई टिहरी रोपवे की घोषणा; टिहरी झील आने वाले समय में देश ही नहीं बल्कि विश्व स्तर पर साहसिक खेलों और पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगी : पुष्कर सिंह धामी 


नई टिहरी 6 मार्च । चार वर्षों के लंबे अंतराल के बाद इस बार टिहरी लेक फेस्टिवल नए स्वरूप और व्यापक दायरे के साथ आयोजित हो रहा है। कोविड-19 के कारण पिछले चार वर्षों से इस महोत्सव का आयोजन नहीं हो पाया था, लेकिन राज्य सरकार के प्रयासों से इस बार यह गतिरोध टूट गया है। इस बार का टिहरी लेक फेस्टिवल कई मायनों में खास है, क्योंकि पहली बार केवल टिहरी शहर ही नहीं बल्कि पूरा जिला इस आयोजन की मेजबानी कर रहा है।
इस बार फेस्टिवल का आयोजन टिहरी के साथ-साथ नरेंद्रनगर, घनसाली, प्रतापनगर, धनोल्टी और देवप्रयाग जैसे क्षेत्रों में भी किया जा रहा है। इन स्थानों पर ट्रैकिंग, साहसिक खेलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों सहित कई गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। टिहरी लेक फेस्टिवल के इतिहास में पहली बार इन क्षेत्रों को भी महोत्सव से जोड़ा गया है, जिससे पर्यटन गतिविधियों को नया विस्तार मिलने की उम्मीद है।
राज्य सरकार की नीति के तहत अब बड़े आयोजनों को किसी एक स्थान तक सीमित न रखकर विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक क्षेत्रों को ऐसे आयोजनों का लाभ मिल सके। इससे पहले राष्ट्रीय खेलों का आयोजन भी देहरादून के साथ-साथ हरिद्वार, हल्द्वानी, रुद्रपुर, टिहरी और पिथौरागढ़ जैसे शहरों में किया गया था।
जिलाधिकारी टिहरी  नितिका खंडेलवाल ने कहा कि टिहरी जिले के कई क्षेत्र पर्यटन के मानचित्र पर और भी अधिक चमक सकते हैं। टिहरी लेक फेस्टिवल में विभिन्न क्षेत्रों की भागीदारी से निश्चित रूप से सकारात्मक और सार्थक परिणाम सामने आएंगे।

मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कहा कि टिहरी झील आने वाले समय में देश ही नहीं बल्कि विश्व स्तर पर साहसिक खेलों और पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगी। इस अवसर पर उन्होंने कोटी कालोनी-नई टिहरी रोपवे निर्माण की घोषणा भी की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की धरती आध्यात्मिकता, प्रकृति और लोक संस्कृति का अद्भुत संगम है। यहां की नदियां, पर्वत, झीलें और परंपराएं पूरे विश्व को आकर्षित करती हैं। टिहरी झील के किनारे आयोजित यह महोत्सव पर्यटन, खेल और स्थानीय संस्कृति को एक मंच पर लाने का महत्वपूर्ण प्रयास है।
उन्होंने कहा कि हिमालय की गोद में स्थित टिहरी झील प्राकृतिक सौंदर्य का अनुपम उदाहरण होने के साथ-साथ साहसिक खेलों के लिए भी तेजी से उभर रहा केंद्र है। यहां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की जल क्रीड़ा प्रतियोगिताओं का आयोजन खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दे रहा है और उत्तराखंड को वैश्विक खेल मानचित्र पर नई पहचान दिला रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार टिहरी को वाटर स्पोर्ट्स और एडवेंचर स्पोर्ट्स के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। इसके तहत टिहरी झील में कयाकिंग, कैनोइंग, जेट-स्की, पैरा-सेलिंग और स्कूबा डाइविंग जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं, जिससे प्रदेश के युवा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड से भावनात्मक लगाव जगजाहिर है और उनके मार्गदर्शन में राज्य में पर्यटन और साहसिक खेलों को नई दिशा मिल रही है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में टिहरी में 400 से अधिक युवा पैराग्लाइडिंग का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं, जो प्रदेश के लिए गर्व की बात है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने एशियन डेवलपमेंट बैंक के वित्तपोषण से बनने वाले कोटी-डोबरा पर्यटन मार्ग का वर्चुअल शिलान्यास भी किया। करीब 15 किलोमीटर लंबाई वाले इस मार्ग के निर्माण पर लगभग 318 करोड़ रुपये की लागत आएगी।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह, विधायक किशोर उपाध्याय, विक्रम सिंह नेगी, विनोद कंडारी, शक्तिलाल शाह, पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष संजय नेगी, जिला पंचायत अध्यक्ष इशिता सजवाण, जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल, नगर पालिका परिषद नई टिहरी के अध्यक्ष मोहन सिंह रावत, चंबा की अध्यक्ष सोबनी धनोला तथा भाजपा जिलाध्यक्ष उदय सिंह रावत सहित कई जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी मौजूद रहे।कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने देवडोलियों से आशीर्वाद भी प्राप्त किया।


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