ऋषिकेश से अंतरराज्य गिरोह सांसी गैंग के तीन चोरों को डेढ़ लाख की नकदी के साथ किया गिरफ्तार


ऋषिकेश 28 जून। पिछलेेे कुछ  दिनों सेेेेेे उत्तराखंड के देहरादून हरिद्वार व ऋषिकेश जैसेेेे शहरों  मे सांसी गैंग द्वारा चोरी व लूटपाट की वारदातों को अंजाम दे रहे थे । जो कि पुलिस के लिए बड़ी सर दर्द बन गया था । जिसको लेकर पुलिस टीम बडी सरगर्मी से इनकी तलाश कर रही थीं। जिसमे  पुलिस टीम को बड़ी सफलता हाथ लगी।  एसओजी देहात व कोतवाली ऋषिकेश की संयुक्त टीम द्वारा, तीन मुकदमों में संदिग्ध चोरों की तलाश में आज 3 शातिर चोर जो कि रोहतक हरियाणा के सांसी गैगंं केे हैै, को डेढ़ लाख रुपए की नगदी सहित गिरफ्तार कर लियाा गया हैै।

बताते चलें उक्त तीनों मुकदमें जिसमे पहला केस में कोतवाली ऋषिकेश में दिनांक 26 जून को  ऋतुराज कुडियाल पुत्र श्री सियाराम कुडियाल निवासी ढालवाला मुनी की रेती टिहरी गढ़वाल के द्वारा एक प्रार्थना पत्र दिया गया कि दिनांक 18 जून को उनकी पत्नी का आईएसबीटी ऋषिकेश में अज्ञात व्यक्ति द्वारा बैग में रखी ज्वेलरी को चोरी कर लिया गया है। शिकायतकर्ता की उक्त शिकायत पर कोतवाली ऋषिकेश में मुकदमा अपराध संख्या 296/21 धारा 379 आईपीसी पंजीकृत कर विवेचना प्रारंभ की गई थी।

दिनांक 27 जून को शिकायतकर्ता सोहन सिंह नेगी पुत्र श्री मोहन सिंह नेगी निवासी गढ़वाली मोहल्ला बालावाला देहरादून में एक प्रार्थना पत्र दिया कि 16 जून की सुबह मैं ऋषिकेश बस अड्डे पर अपनी माता जी के साथ खड़ा था, जहां से उनका पर्स चोरी हो गया। जिसमें गले का हार, झुमके आदि सामान था।
शिकायतकर्ता की उक्त शिकायत पर कोतवाली ऋषिकेश में मुकदमा अपराध संख्या 297/21, धारा 379 आईपीसी पंजीकृत कर विवेचना प्रारंभ की गई थी।

इसके अलावा तीसरे केस में दिनांक 27 जून को शिकायतकर्ता राजेंद्र सिंह रमोला पुत्र स्वर्गीय श्री उदय सिंह रमोला निवासी टिहरी विस्थापित कॉलोनी हरिद्वार के द्वारा एक प्रार्थना पत्र दिया गया कि दिनांक 23 जून को दोपहर के समय टिहरी गढ़वाल की बस में ऋषिकेश से हरिद्वार जाते समय किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा ज्वेलरी को चोरी कर लिया गया है।
शिकायतकर्ता की उक्त शिकायत पर कोतवाली ऋषिकेश में मुकदमा अपराध संख्या 298/21 धारा 379 आईपीसी पंजीकृत कर विवेचना प्रारंभ की गई थी।

चोरी एवं टप्पेबाजी की उक्त घटनाओं का सफल अनावरण करते हुए, अभियुक्तों की गिरफ्तारी कर, माल की शत-प्रतिशत बरामदगी करने हेतु  वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महोदय जनपद देहरादून के द्वारा आदेशित किया गया था।
जिसके अनुपालन में पुलिस अधीक्षक देहात व क्षेत्राधिकारी ऋषिकेश महोदय द्वारा प्रभारी निरीक्षक कोतवाली ऋषिकेश के नेतृत्व में आवश्यक दिशा निर्देश देकर एसओजी देहात व ऋषिकेश पुलिस की 04 (चार) संयुक्त पुलिस टीम का गठन किया गया।

जिस पर गठित पुलिस टीम द्वारा मुखबिर की सूचना पर सीसीटीवी से प्राप्त फोटो से मिलते जुलते हुलिए के तीन (3) संदिग्ध व्यक्तियों को आईएसबीटी ऋषिकेश के अंदर से गिरफ्तार किया गया है।  जिसमे संजय कुमार पुत्र श्री मन्थीराम निवासी करतार पुर थाना रोहतक सिटी जिला रोहतक हरियाणाउम्र 44 वर्ष, विनोद कुमार पुत्र श्री सतवीर सिंह निवासी करतारपुर थाना सिटी रोहतक जिला हरियाणा उम्र 28 वर्ष, सत्यवान पुत्र श्री चंदू निवासी ग्राम पेटवाण थाना नारनौल जिला हिसार हरियाणा उम्र 45 वर्ष  अभियुक्त हैं ।

उक्त तीनों अभियुक्तों से  ₹50000 प्रत्येक के पास की नकदी के साथ कुल मिलाकर डेढ़ लाख रुपए बरामद हुए हैं।

पूछताछ से मालुम हुआ कि यह गैंग गांव कड़ीया जिला राजगढ़ मध्यप्रदेश की रहनें वाली है, तथा सांसी जाति के लोग है। गांव मे हर कोई चोरी, जेब तराशी के अपराधों में लिप्त है।
इस गैंग मे वारदात करनें के लिए चार से पांच व्यक्ति मौजूद रहते है। जो आवागमन मे कार का उपयोग करते है। जिसकी नम्बर प्लेट फर्जी होती है। मोबाईल फोन का प्रयोग ये लोग बिलकुल नही करते या दूसरे राज्यों की फर्जी सिम का प्रयोग करते हैं जिससे पुलिस उन तक नही पहुंच सकें। ये लोग किसी ऐसे होटल या स्थान पर नही रूकतें जहां इनसे आईडी मांगी जाए। इसकी बजाए धार्मिक स्थानों पर जहां अकसर ज्यादा पूछताछ नही होती या हाईवे पर बने ढाबों पर रात गुजारतें है। जिस स्थान पर ये रूकते है उससे कम से कम 100 कि.मी. की दुरी पर ये लोग वारदात करते है। किसी भी स्थान पर एक दिन से ज्यादा नही रूकते है।

वारदात करनें के लिए ये ऐसे बैंक का चयन करतें है जो मुख्य बाजार में हो तथा भीड़ भाड़ हो। ज्यादातर ये लोग भारतीय स्टेट बैक का चयन करते है जो मुख्य बाजार मे स्थित हो। गैग मे से एक या दो व्यक्ति बैंक मे जाकर ये देखते है कि किस व्यक्ति द्वारा नगदी निकलवाई गई। इनका एक सदस्य बैंक से बाहर रहता है। एक साथी काफी दूरी पर कार लेकर खड़ा रहता हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति थैले या बैग में नगदी निकलवाकर बाहर आता है तो रेकी करने वाला व्यक्ति बाहर खड़े व्यक्ति को ईशारा कर देते है और वह पीड़ित के पीछे लग जाता है और जैसे ही उसका ध्यान भंग होता है उसकी नगदी भरा थैला या बैग पार कर लेते है। उसके बाद आँटो पकड़कर पहले से खड़ी की गई कार के पास पहुंच कर फरार हो जाते हैं।

यह गैंग कृषि उपज मंडी जहां पर लोग फसल बेचकर नगदी प्राप्त करते है या त्यौहारों के समय भीाड़ भाड़ वाले स्थानो पर रेकी करते है। कोई व्यक्ति नगदी या कीमती सामान बैग मे ले जा रहा हो तो उसकी रेकी करते है और इनमें से ही गैंग का एक सदस्य बिस्किट चबाकर शिकार के कपड़ो पर थूक देता है जो उल्टी या मैले जैसा दिखता है। शिकार व्यक्ति मैले को खुद देखकर या किसी व्यक्ति द्वारा बताने पर रूक जाता है और आस पास कोई नल या पानी का स्रोत तलाश करता है ताकि वह मैला साफ कर सके। गैंग के सदस्य उसका पीछा करते रहते है। जैसे ही शिकार किसी स्थान पर अपना बैग नीचे रखकर मैले को साफ करने लग जाता है और मौका पाकर ये लोग बैग पार कर लेते है। बस तथा रेलवे स्टेशन आदि में लोगों को चिन्हित कर उनके आसपास अपना बैग रख देते हैं तथा मौका पाकर बैग बदलकर घटना को अंजाम देते हैं।

पूछताछ में अभियुक्तों द्वारा बताया गया कि  हम लोग 8- 10 दिन से टप्पे बाजी की घटना करने के लिए ऋषिकेश बस अड्डे के आसपास घूमते रहे थे, तथा मौका देखकर या बातों में उलझा कर लोगों का सामान उनके बैग में से चुरा लिया करते हैं। हम तीनों के अलावा हमारे दो अन्य साथी भी हमारे साथ उक्त घटना में शामिल रहे हैं। हम पांचों ने मिलकर 16 जून, 18 जून व 23 जून को बस अड्डा ऋषिकेश में तीन घटनाएं की थी, तथा तीनों वारदातों में हमें सोने के गहने मिले थे। जिसको लेकर हमारा साथी मुकेश व सोनू रोहतक चले गए थे। दिनांक 25 जून को मुकेश ने हम तीनो को 50-50 हजार रुपए दिए थे।

तीनों अभियुक्तों कि उत्तराखंड  व सरहदी अन्य जनपदों से भी इनके अपराधिक इतिहास की जानकारी की जा रही है।तीनों अभियुक्तों को समय से माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा।

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