देहरादून 12 जनवरी। उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने के बाद विवाह पंजीकरण में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य बन गया है, जहाँ यूसीसी को लागू किया गया है। इसके बाद लोगों में विवाह पंजीकरण को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ी है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पुराने कानून की तुलना में विवाह पंजीकरण की प्रतिदिन औसत संख्या 24 गुना बढ़ गई है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान उत्तराखण्ड में यूसीसी लागू करने का संकल्प लिया था। सत्ता में आने के बाद पहली कैबिनेट बैठक में ही इस पर निर्णय लिया गया और सभी संवैधानिक प्रक्रियाओं के बाद 27 जनवरी 2025 से राज्य में यूसीसी लागू कर दिया गया।
यूसीसी का उद्देश्य समाज में समानता, लैंगिक न्याय और समान अधिकारों को मजबूत करना है। इस कानून के तहत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों से जुड़े प्रावधानों को एक समान कानून के दायरे में लाया गया है। महिला और पुरुषों के लिए विवाह की समान आयु निर्धारित की गई है तथा बहुविवाह जैसी कुप्रथाओं पर प्रभावी रोक लगाई गई है।
यूसीसी लागू होने के बाद विवाह पंजीकरण में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है। 27 जनवरी 2025 से जुलाई 2025 तक मात्र छह माह में राज्य में तीन लाख से अधिक विवाह पंजीकरण हुए हैं। वहीं पुराने कानून के तहत वर्ष 2010 से 26 जनवरी 2025 तक कुल 3 लाख 30 हजार 064 विवाह पंजीकरण दर्ज किए गए थे।
यदि प्रतिदिन के औसत की बात करें तो पुराने कानून के अंतर्गत जहां केवल 67 विवाह प्रतिदिन पंजीकृत होते थे, वहीं यूसीसी लागू होने के बाद यह संख्या बढ़कर 1634 प्रतिदिन तक पहुंच गई है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता लागू करना राज्य सरकार का ऐतिहासिक और साहसिक निर्णय है। उन्होंने कहा कि यूसीसी का उद्देश्य सभी नागरिकों को समान अधिकार और समान सम्मान देना है। विवाह पंजीकरण में आई तेज़ वृद्धि इस बात का प्रमाण है कि जनता ने इस कानून को स्वीकार किया है और इसे सामाजिक सुधार के रूप में देखा है।
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