ऋषिकेश 8 अप्रैल नगर निगम ऋषिकेश की बोर्ड बैठक में उस समय विवादों में घिर गई जब शहर के विकास कार्यों और निगम में कथित भ्रष्टाचार के मुद्दों को लेकर पार्षदों के बीच तीखी बहस छिड़ गई। बैठक का उद्देश्य शहर में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा करना और आगामी योजनाओं पर निर्णय लेना था, लेकिन आरोप-प्रत्यारोप और गलतफहमियों के कारण बैठक का माहौल काफी गरमा गया।
बुधवार को नगर निगम परिसर में हुई नगर निगम बोर्ड बैठक के दौरान कुछ पार्षदों ने नगर निगम में विकास कार्यों में पारदर्शिता की कमी और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई योजनाओं में कार्यों की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है और बजट के उपयोग को लेकर भी स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है। इस पर अन्य पार्षदों ने आपत्ति जताते हुए इन आरोपों को निराधार बताया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।
स्थिति इतनी गरमा गई कि बैठक के दौरान कुछ समय के लिए कार्यवाही भी बाधित हो गई। पार्षदों के बीच वाक् युद्ध और तीखी टिप्पणियों के कारण बैठक का माहौल तनावपूर्ण बना रहा। हालांकि बाद में वरिष्ठ अधिकारियों और महापौर की मध्यस्थता के बाद किसी तरह बैठक की कार्यवाही आगे बढ़ाई गई।
बैठक में शहर की सड़कों, सफाई व्यवस्था, जल निकासी, स्ट्रीट लाइट और अन्य आधारभूत सुविधाओं से जुड़े कई प्रस्तावों पर भी चर्चा की गई। पार्षदों ने अपने-अपने वार्डों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया और जल्द समाधान की मांग की।
वहीं शहर के नागरिकों के बीच भी यह सवाल उठने लगा है कि यदि नगर निगम की बैठकों में ही आपसी विवाद और आरोप-प्रत्यारोप का माहौल रहेगा तो शहर के विकास कार्य किस तरह गति पकड़ पाएंगे। लंबे समय से निगम में भ्रष्टाचार और घोटालों के आरोप भी समय-समय पर सामने आते रहे हैं, लेकिन इन पर ठोस कार्रवाई कम ही देखने को मिली है।
ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नगर निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधि मिलकर शहर के विकास को प्राथमिकता देते हैं या फिर विवादों के बीच विकास कार्य प्रभावित होते रहेंगे।












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