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होप फॉर होपलेस’ शिविर में दिव्यांग बच्चों को मिला विशेषज्ञ उपचार, 96 मरीजों का हुआ पंजीकरण


ऋषिकेश 13 जुलाई। मानसिक एवं शारीरिक रूप से दिव्यांग बच्चों के लिए प्रेडिक्टिव होमियोपैथी एवं कैलाश आश्रम, ऋषिकेश के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को आठवें नि:शुल्क “होप फॉर होपलेस” शिविर का आयोजन भक्त निवास, कैलाश आश्रम, मुनि की रेती में किया गया। शिविर में देश के विभिन्न राज्यों से आए बच्चों और उनके अभिभावकों ने भाग लिया तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श प्राप्त किया।


शिविर में सेरेब्रल पाल्सी, ऑटिज्म, डाउन सिंड्रोम, हृदय में छेद (जन्मजात हृदय रोग), मूक-बधिरता सहित अन्य जटिल एवं गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रसित बच्चों की जांच एवं परामर्श किया गया। आयोजन का उद्देश्य ऐसे बच्चों और उनके अभिभावकों को विशेषज्ञ चिकित्सा मार्गदर्शन उपलब्ध कराना तथा उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करना था।
यह शिविर विश्व प्रसिद्ध होमियोपैथिक चिकित्सक डॉ. अंबरीश विजयकर के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि समय पर उपचार, उचित मार्गदर्शन और निरंतर देखभाल से विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार लाया जा सकता है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों के उपचार के प्रति धैर्य और नियमितता बनाए रखने का आह्वान किया।
शिविर में देशभर से पहुंचे अनुभवी होमियोपैथिक चिकित्सकों की टीम ने सेवाएं प्रदान कीं। इनमें डॉ. शिवकुमार बरनवाल, डॉ. अवधेश कुमार, डॉ. रामलखन सिंह, डॉ. अनिल सिंह, डॉ. धनंजय, डॉ. जितेंद्र, डॉ. अजीत, डॉ. प्रणव ममगाईं, डॉ. सचिन राजपूत तथा डॉ. अक्षय पैन्यूली सहित कई विशेषज्ञ चिकित्सक शामिल रहे।
आयोजकों ने बताया कि पूर्व में आयोजित सात शिविरों में उपचार एवं परामर्श प्राप्त करने वाले बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति में उत्साहवर्धक परिणाम देखने को मिले हैं, जिससे अभिभावकों का विश्वास बढ़ा है। इसी कारण इस बार भी बड़ी संख्या में लोगों ने शिविर में रुचि दिखाई।
शिविर के दौरान कुल 96 मरीजों का पंजीकरण किया गया। चिकित्सकों ने बच्चों की विस्तृत जांच कर उनके स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का आकलन किया तथा आगे के उपचार और देखभाल के संबंध में आवश्यक सुझाव दिए। शिविर के सफल आयोजन पर अभिभावकों ने आयोजकों और चिकित्सकों की टीम का आभार व्यक्त किया।
आयोजन समिति ने भविष्य में भी ऐसे जनहितकारी शिविरों का आयोजन जारी रखने की बात कही, ताकि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों और उनके परिवारों को बेहतर चिकित्सा परामर्श एवं सहयोग मिल सके।


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